Thursday, 13 September 2018

जन्म के समय शरीर से बाहर था इस बच्ची का दिल

क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सुना है जिसका दिल उसके शरीर के बाहर हो. इंग्लैंड के नॉटिंघम इलाक़े में एक बच्ची के साथ ऐसा ही हुआ. वेनेलोपी का दिल उसके शरीर के बाहर था. मगर डॉक्टरों ने इसे एक चुनौती की तरह लिया. आख़िर नौ महीने अस्पताल में गुज़ारने के बाद वेनेलोपी पहली बार अपने घर आ सकी है. इस रिपोर्ट की कुछ तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं.किन अचानक इस मामले में एक कुतिया की वजह से एक नया मोड़ आ गया और हॉर्नर 50 साल की सजा से बरी हो गए.
यह सबकुछ हुआ एक लैब्राडोर कुतिया 'लूसी' की वजह से.
42 साल के हॉर्नर पर आरोप था कि उन्होंने एक बच्ची का यौन शोषण किया, 'लूसी' पर गोली चलाई ताकि पुलिस के सामने उसका भेद न खुल सके.
लेकिन बाद में लूसी अपने नए मालिक के साथ पाई गई और हॉर्नर भी सजा से बच गए.
मूल केस की सुनवाई के दौरान भी कोर्ट ने सर्वसम्मत फ़ैसला नहीं दिया था. गैर-लाभकारी क़ानूनी संस्थान ओरेगन इनोसेंस प्रोजेक्ट हॉर्नर के केस की समीक्षा कर रही थी, जिसमें कई ख़ामियां पाई गई थीं.
अप्रैल में संस्थान ने स्थानीय सरकारी वकील जॉन हमल से केस पर कुछ आपत्ति जताई थी, जिसके बाद वो संस्थान के साथ मिलकर काम करने को राजी हुए थे.
सवाल ये भी था कि लूसी आखिर कहां गई थी. हॉर्नर का कहना था कि लूसी ज़िंदा है और उन्होंने उसे मारने की कोशिश नहीं की थी
हॉर्नर के इस दावे के बाद संस्थान और सरकारी वकील के कार्यालय के अधिकारियों ने लूसी को ढूंढने की काफी कोशिश की.
अंत में टीम ने ओरेगन कोस्ट में लूसी और उसके मालिक को ढूंढ निकाला.
संस्थान के अधिकारी लिसा क्रिस्टन का कहना है कि लूसी की पहचान उसकी दिखावट और कुछ अन्य सबूतों के आधार पर की गई थी.
लूसी के मिलने के बाद यह साबित हो गया कि बच्ची ने ग़लत बयान दिया था.
हॉर्नर को इसके बाद रिहा कर दिया गया.
अल्फ्रेड नोबेले, नोबेल पुरस्कार, डायनामाइट, बोफोर्स, कंप्यूटर माउस, फुटबॉल टीम या फिर म्यूजिकल बैंड एबा ?
आपके दिमाग में इस देश की चाहे जो पहचान दर्ज़ हो, वहां के लोग तो अर्से से अपने समाज के खुलेपन, लैंगिक समानता और राजनीति के उदार चरित्र पर इतराते रहे हैं.
जहां सरकारें लोगों की ज़िंदगी में झांकती नहीं बल्कि समाज कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं और पारदर्शिता तय करने में जुटी दिखती हैं.
हथियार निर्यात करने के मामले में आला देशों की कतार में होने के बाद भी स्वीडन ने साल 1814 के बाद कोई जंग नहीं लड़ी है. हां लोग दुनिया में सबसे अमीर हैं. उनके रहन सहन का स्तर ऊंचा है. सरकार समाज कल्याण पर ध्यान देती है. इसने गरीबी को ख़त्म कर दिया है. यहां हड़तालें नहीं होतीं हैं. यहां हर चीज और हर कोई काम करता है. ये दुनिया का इकलौता देश है, जहां सात साल के बच्चे को सेक्स का सबक दिया जाता है."
पैमाना खुशी का हो या संपन्नता का. स्वीडन की गिनती बरसों से टॉप दस देशों में होती है. युवा हों या बुजुर्ग रहने के लिहाज से हर उम्र के लोगों के लिए इसे अव्वल मुल्क माना जाता रहा है.
लेकिन स्वीडन की ये पहचान अब बदल रही है. दक्षिणी शहर मोल्मो में रहने वाली एक महिला कहती हैं, "हम बहुत खुशकिस्मत थे. लेकिन हम अब समाज में दिक्कतें देख रहे हैं. जरूरी नहीं है कि इसका संबंध प्रवासियों से हो. अब लोगों को लगता है कि मेरे बच्चे का स्कूल ठीक नहीं चल रहा है. मेरे बुजुर्ग माता-पिता की ठीक से देखभाल नहीं हो रही है. बसें और ट्रेनें हमेशा देर से चल रही हैं. तो लोगों को लगता है कि वो सबकुछ ठीक कर रहे हैं लेकिन उन्हें वो सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जो पहले मिलती थीं."
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