Tuesday, 18 September 2018

德里雾霾“红警”映射出全球气候行动的失败

由于空气污染严重,德里采取了类似北京空气污染红色预警的强干预手段,包括学校停课。但解决空气污染问题的明确方案却尚未产生,各地方政府彼此之间,以及地方与中央政府机构之间还在相互指责。

印度环境部长哈什·瓦尔丹建议居民不要恐慌,并表示政府已经制定了分级预警行动计划。但该计划据称已经实施了12个月之久,却似乎并没有起到什么作用,德里的空气污染却还是跟去年一样糟糕。

解决德里的空气污染问题有一个显而易见但却成本很高的办法。印度北部地区高达90%的空气污染是由于邻近的旁遮普邦和哈里亚纳邦的农民焚烧秸秆所致。印度政府已经制定出了解决计划,但由于相关各邦无法就4.6亿美元的成本如何分担达成一致意见,该计划也就随之破产。

政府已经在气候变化适应问题上花费了大量资金。一项研究表明, 2013-2014财年印度在这个问题上共花费了918亿美元,预计到2030年该数字将增至3600亿美元。
据非政府组织“德国观察”( )估计,极端天气事件造成印度基础设施直接损失高达210亿美元,几乎相当于其GDP总量的1%,并与印度的全年卫生预算不相上下。

因此,德里的雾霾让我们看到了气候变化给发展中国家带来了怎样深重的影响,而这在很大程度上是由发达国家的历史碳排放造成的。

像印度这样的国家在处理这些问题时,承受着巨大损失和费用,从而无法将资金用于那些简单易行但却成本很高的解决方案,这样一来,反而产生了巨大的碳排放。印度人焚烧农作物将不可避免地增加大气中的碳浓度,进而加剧了全世界共同面临的气候变化问题。

问题更严重的是,那些为了保护自己而不得不应对此类问题的国家还必须要提高国内生产总值。在今年波恩气候谈判召开之前专为印度记者举行的一次信息发布会上,德国驻印度大使馆经济、环境和城市发展参赞托马斯·哈格贝克介绍了德国的低碳转型战略。他强调,化石能源转型并不是没有成本的,而且需要大量的资金投入。

德国的人均GDP近42000美元,而印度仅为1850美元。因此,作为仅次于中国、美国和欧盟的第四大碳排放国,印度及其他发展中国家可能会采用那些简单易行、价格低廉的技术来提高国内生产总值,一部分原因是因为适应气候变化
的成本太高。如此一来,燃煤电厂仍是亚洲能源增长的主要驱动力之一也就不足为奇了。

是时候为污染“买单”了

环境污染具有扩散性和长期性,而且众所周知也是未纳入经济核算的主要成本之一。但现在是时候该为此“买单”了。同前几代人相比,现在这一代人是一千年以来首次出现平均寿命缩短的一代。我们的孩子正在为此付出代价,这很大程度上是空气污染造成的。

从今年波恩气候谈判开幕的那一刻起,有关发达国家应如何履行对发展中国家的义务,弥补后者因气候变化而承担的成本和损失的议题,为大会的进程蒙上了一层阴影。

德里的雾霾与全球大背景息息相关,如果没有一个全球性解决方案,德里的雾霾也无法消散。从长远来看,发达国家拒绝讨论这一问题损害的将是我们所有人。
蒙大拿牛肉到波音飞机,中美两国昨天在特朗普的首次对华国事访问期间旋风般签署了大量经贸协议。

一方面,中美两国在朝鲜半岛和贸易问题上的紧张关系还在持续;另一方面,天然气已成为关乎两国共同利益的一个领域。此次中美签署的能源协议金额高达
1400亿美元,占美商贸代表团此次签署协议总金额的一半,其中大部分来自于中方购买美方的液化天然气( )。

但是,正当中国参加波恩联合国气候谈判之时,这些交易不禁让人产生疑问:中国如此大力扩展天然气消费,还能够兑现其气候承诺吗?

过去十年,中国的天然气需求
翻了两番还多。由于国内易于开采的天然气资源有限,近年来中国一直都在关注储量丰富的美国页岩气。2016年,中国约35%的天然气需求靠进口来满足,主要来源国是卡塔尔和澳大利亚,但美国也逐渐占有一席之地。

Thursday, 13 September 2018

जन्म के समय शरीर से बाहर था इस बच्ची का दिल

क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सुना है जिसका दिल उसके शरीर के बाहर हो. इंग्लैंड के नॉटिंघम इलाक़े में एक बच्ची के साथ ऐसा ही हुआ. वेनेलोपी का दिल उसके शरीर के बाहर था. मगर डॉक्टरों ने इसे एक चुनौती की तरह लिया. आख़िर नौ महीने अस्पताल में गुज़ारने के बाद वेनेलोपी पहली बार अपने घर आ सकी है. इस रिपोर्ट की कुछ तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं.किन अचानक इस मामले में एक कुतिया की वजह से एक नया मोड़ आ गया और हॉर्नर 50 साल की सजा से बरी हो गए.
यह सबकुछ हुआ एक लैब्राडोर कुतिया 'लूसी' की वजह से.
42 साल के हॉर्नर पर आरोप था कि उन्होंने एक बच्ची का यौन शोषण किया, 'लूसी' पर गोली चलाई ताकि पुलिस के सामने उसका भेद न खुल सके.
लेकिन बाद में लूसी अपने नए मालिक के साथ पाई गई और हॉर्नर भी सजा से बच गए.
मूल केस की सुनवाई के दौरान भी कोर्ट ने सर्वसम्मत फ़ैसला नहीं दिया था. गैर-लाभकारी क़ानूनी संस्थान ओरेगन इनोसेंस प्रोजेक्ट हॉर्नर के केस की समीक्षा कर रही थी, जिसमें कई ख़ामियां पाई गई थीं.
अप्रैल में संस्थान ने स्थानीय सरकारी वकील जॉन हमल से केस पर कुछ आपत्ति जताई थी, जिसके बाद वो संस्थान के साथ मिलकर काम करने को राजी हुए थे.
सवाल ये भी था कि लूसी आखिर कहां गई थी. हॉर्नर का कहना था कि लूसी ज़िंदा है और उन्होंने उसे मारने की कोशिश नहीं की थी
हॉर्नर के इस दावे के बाद संस्थान और सरकारी वकील के कार्यालय के अधिकारियों ने लूसी को ढूंढने की काफी कोशिश की.
अंत में टीम ने ओरेगन कोस्ट में लूसी और उसके मालिक को ढूंढ निकाला.
संस्थान के अधिकारी लिसा क्रिस्टन का कहना है कि लूसी की पहचान उसकी दिखावट और कुछ अन्य सबूतों के आधार पर की गई थी.
लूसी के मिलने के बाद यह साबित हो गया कि बच्ची ने ग़लत बयान दिया था.
हॉर्नर को इसके बाद रिहा कर दिया गया.
अल्फ्रेड नोबेले, नोबेल पुरस्कार, डायनामाइट, बोफोर्स, कंप्यूटर माउस, फुटबॉल टीम या फिर म्यूजिकल बैंड एबा ?
आपके दिमाग में इस देश की चाहे जो पहचान दर्ज़ हो, वहां के लोग तो अर्से से अपने समाज के खुलेपन, लैंगिक समानता और राजनीति के उदार चरित्र पर इतराते रहे हैं.
जहां सरकारें लोगों की ज़िंदगी में झांकती नहीं बल्कि समाज कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं और पारदर्शिता तय करने में जुटी दिखती हैं.
हथियार निर्यात करने के मामले में आला देशों की कतार में होने के बाद भी स्वीडन ने साल 1814 के बाद कोई जंग नहीं लड़ी है. हां लोग दुनिया में सबसे अमीर हैं. उनके रहन सहन का स्तर ऊंचा है. सरकार समाज कल्याण पर ध्यान देती है. इसने गरीबी को ख़त्म कर दिया है. यहां हड़तालें नहीं होतीं हैं. यहां हर चीज और हर कोई काम करता है. ये दुनिया का इकलौता देश है, जहां सात साल के बच्चे को सेक्स का सबक दिया जाता है."
पैमाना खुशी का हो या संपन्नता का. स्वीडन की गिनती बरसों से टॉप दस देशों में होती है. युवा हों या बुजुर्ग रहने के लिहाज से हर उम्र के लोगों के लिए इसे अव्वल मुल्क माना जाता रहा है.
लेकिन स्वीडन की ये पहचान अब बदल रही है. दक्षिणी शहर मोल्मो में रहने वाली एक महिला कहती हैं, "हम बहुत खुशकिस्मत थे. लेकिन हम अब समाज में दिक्कतें देख रहे हैं. जरूरी नहीं है कि इसका संबंध प्रवासियों से हो. अब लोगों को लगता है कि मेरे बच्चे का स्कूल ठीक नहीं चल रहा है. मेरे बुजुर्ग माता-पिता की ठीक से देखभाल नहीं हो रही है. बसें और ट्रेनें हमेशा देर से चल रही हैं. तो लोगों को लगता है कि वो सबकुछ ठीक कर रहे हैं लेकिन उन्हें वो सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जो पहले मिलती थीं."
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